Somnath Jyotirlinga – प्रथम ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, पौराणिक कथा एवं महत्व
Somnath Jyotirlinga भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह दिव्य मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में अरब सागर के किनारे स्थित है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव स्वयं यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। सदियों में इस मंदिर को कई बार आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया, लेकिन हर बार इसकी भव्यता और श्रद्धा पहले से भी अधिक मजबूत होकर लौटी। यही कारण है कि Somnath Jyotirlinga सनातन धर्म की अटूट आस्था, साहस और पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है।
- Somnath Jyotirlinga क्या है?
- सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
- प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
- सोमनाथ नाम कैसे पड़ा?
- चंद्रदेव की पौराणिक कथा
- सोमनाथ मंदिर का इतिहास
- मंदिर का धार्मिक महत्व
- वर्तमान सोमनाथ मंदिर
Somnath Jyotirlinga क्या है?
Somnath Jyotirlinga भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर आता है। शिव पुराण के अनुसार जहां भगवान शिव स्वयं ज्योति के अनंत स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, उन पवित्र स्थानों को ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की हजारों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक विरासत है। यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि Somnath Jyotirlinga के दर्शन करने मात्र से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
Somnath Jyotirlinga गुजरात राज्य के गिर-सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन (Prabhas Patan) में स्थित है। यह मंदिर अरब सागर के तट पर बना हुआ है और इसकी भव्य वास्तुकला दूर से ही श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पृथ्वी अवतार की अंतिम लीला संपन्न की थी।
- राज्य: गुजरात
- जिला: गिर-सोमनाथ
- स्थान: प्रभास पाटन
- निकटतम रेलवे स्टेशन: Somnath Railway Station
- निकटतम एयरपोर्ट: दीव एयरपोर्ट एवं राजकोट एयरपोर्ट
Somnath Jyotirlinga को प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग Somnath Jyotirlinga है। इसी कारण इसे “आदि ज्योतिर्लिंग” भी कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले चंद्रदेव ने भगवान शिव की तपस्या कर इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। इसलिए इसका नाम “सोमनाथ” पड़ा, जिसका अर्थ है— “चंद्रमा के स्वामी”।
सोमनाथ नाम कैसे पड़ा?
संस्कृत में “सोम” का अर्थ चंद्रमा तथा “नाथ” का अर्थ स्वामी होता है। अर्थात् सोमनाथ का अर्थ हुआ “चंद्रमा के भगवान” या “चंद्रदेव के आराध्य”।
पौराणिक कथा के अनुसार जब चंद्रदेव को श्राप मिला, तब उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी। तभी से भगवान शिव यहां Somnath Jyotirlinga के रूप में पूजे जाते हैं।
चंद्रदेव और Somnath Jyotirlinga की पौराणिक कथा
प्रजापति दक्ष की 27 कन्याओं का विवाह चंद्रदेव के साथ हुआ था। ये 27 कन्याएं 27 नक्षत्रों का प्रतीक मानी जाती हैं।
लेकिन चंद्रदेव अपनी सभी पत्नियों में से केवल रोहिणी से अधिक प्रेम करते थे। इससे अन्य पत्नियाँ दुखी रहने लगीं और उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति से शिकायत की।
दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करने की सलाह दी, लेकिन जब चंद्रदेव ने उनकी बात नहीं मानी तो उन्होंने उन्हें क्षय रोग (तेज घटने) का श्राप दे दिया।
श्राप के प्रभाव से चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम होने लगा। देवता और ऋषि चिंतित हो गए क्योंकि चंद्रमा के बिना सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।
तब सभी देवताओं ने चंद्रदेव को भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी।
चंद्रदेव प्रभास क्षेत्र पहुंचे और कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। अंततः भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया कि वे प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष में क्षीण होंगे तथा शुक्ल पक्ष में पुनः बढ़ेंगे।
इसी घटना की स्मृति में भगवान शिव यहां Somnath Jyotirlinga के रूप में स्थापित हुए।

Somnath Jyotirlinga का धार्मिक महत्व
हिन्दू धर्म में Somnath Jyotirlinga का दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है। लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहां भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।
- बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान।
- भगवान शिव का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग।
- चंद्र दोष निवारण के लिए विशेष स्थान।
- महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति।
- मोक्ष प्रदान करने वाला पवित्र तीर्थ।
- शिव भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण धामों में से एक।
वर्तमान Somnath Jyotirlinga मंदिर
आज का भव्य Somnath Jyotirlinga Temple चालुक्य शैली की अद्भुत वास्तुकला में निर्मित है। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से कराया गया। मंदिर का शिखर लगभग 155 फीट ऊँचा है और उसके ऊपर स्थापित ध्वज प्रतिदिन कई बार बदला जाता है।
अरब सागर के किनारे स्थित यह मंदिर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। मंदिर परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभव प्रदान करता है।
🕉️ Somnath Jyotirlinga का संदेश
Somnath Jyotirlinga केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अमर आस्था, साहस और पुनर्जागरण का प्रतीक है। अनेक बार विध्वंस के बाद भी इसका पुनर्निर्माण यह संदेश देता है कि सत्य, श्रद्धा और धर्म की विजय सदैव होती है। भगवान शिव की कृपा से भक्तों के जीवन में शांति, शक्ति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
Somnath Jyotirlinga की पूजा विधि
Somnath Jyotirlinga में भगवान शिव की पूजा अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
Somnath Jyotirlinga में पूजा कैसे करें?
1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
मंदिर जाने से पहले स्नान करें और साफ एवं शालीन वस्त्र पहनें। भगवान शिव की पूजा सदैव पवित्र मन और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।
2. भगवान शिव का जलाभिषेक करें
सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल एवं गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी तथा पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. बेलपत्र अर्पित करें
भगवान शिव को तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। बेलपत्र अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
4. धूप-दीप प्रज्वलित करें
भगवान शिव के समक्ष दीपक और धूप जलाकर आरती करें तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
5. मंत्र जाप करें
ॐ नमः शिवाय ॥
यदि संभव हो तो कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करें।
Somnath Jyotirlinga दर्शन समय
Somnath Jyotirlinga Temple प्रतिदिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। समय मौसम और विशेष अवसरों पर बदल सकता है, लेकिन सामान्यतः दर्शन का समय निम्न प्रकार रहता है।
| सेवा | समय |
|---|---|
| मंदिर खुलने का समय | सुबह 6:00 बजे |
| सुबह की आरती | लगभग 7:00 बजे |
| दोपहर आरती | लगभग 12:00 बजे |
| सायंकालीन आरती | लगभग 7:00 बजे |
| मंदिर बंद | रात्रि 9:30 बजे |
महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और अन्य विशेष पर्वों पर दर्शन के समय में परिवर्तन हो सकता है।
Somnath Jyotirlinga में होने वाली आरतियाँ
- 🌅 प्रातःकालीन आरती
- ☀️ मध्याह्न आरती
- 🌙 संध्या आरती
तीनों आरतियों में भाग लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। आरती के समय मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को अद्भुत अनुभूति प्रदान करता है।
रुद्राभिषेक का महत्व
Somnath Jyotirlinga में रुद्राभिषेक विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, शहद तथा पंचामृत से अभिषेक कर अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से—
- ग्रह दोष शांत होते हैं।
- स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
- धन एवं समृद्धि बढ़ती है।
- मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Somnath Jyotirlinga कैसे पहुँचें?
✈️ हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा दीव (Diu Airport) है, जो लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राजकोट और अहमदाबाद से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
🚆 रेल मार्ग
Somnath Railway Station मंदिर से बहुत कम दूरी पर स्थित है। भारत के प्रमुख शहरों से यहाँ ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है।
🚌 सड़क मार्ग
गुजरात राज्य परिवहन तथा निजी बस सेवाएँ अहमदाबाद, राजकोट, जूनागढ़, द्वारका और अन्य शहरों से नियमित रूप से उपलब्ध हैं।
यात्रा का सबसे अच्छा समय
वैसे तो पूरे वर्ष Somnath Jyotirlinga के दर्शन किए जा सकते हैं, लेकिन अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है।
- महाशिवरात्रि
- सावन मास
- कार्तिक पूर्णिमा
- श्रावण सोमवार
इन अवसरों पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
Somnath Jyotirlinga के आसपास घूमने योग्य स्थान
- 📍 त्रिवेणी संगम
- 📍 भालका तीर्थ
- 📍 गीता मंदिर
- 📍 लक्ष्मीनारायण मंदिर
- 📍 सूर्य मंदिर
- 📍 प्रभास पाटन संग्रहालय
- 📍 समुद्र तट (Somnath Beach)
🙏 यात्रा सुझाव
यदि आप Somnath Jyotirlinga की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सुबह जल्दी दर्शन करें। मंदिर परिसर के नियमों का पालन करें, स्वच्छता बनाए रखें और भगवान शिव के दर्शन श्रद्धा एवं शांत मन से करें। महाशिवरात्रि और सावन के समय अत्यधिक भीड़ रहती है, इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग पहले से कर लेना बेहतर रहता है।
Somnath Jyotirlinga पर हुए आक्रमणों का इतिहास
Somnath Jyotirlinga केवल भगवान शिव का पवित्र धाम ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अटूट आस्था और संघर्ष का भी प्रतीक है। इतिहास में इस मंदिर पर कई विदेशी आक्रमण हुए। आक्रमणकारियों ने मंदिर की अपार संपत्ति को लूटने और इसकी धार्मिक महत्ता को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार श्रद्धालुओं की आस्था और हिंदू समाज के सहयोग से इसका पुनर्निर्माण हुआ।
इसी कारण Somnath Jyotirlinga को भारत के सबसे प्रेरणादायक धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
महमूद गजनवी का आक्रमण
सन 1025 ईस्वी में गजनवी के शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया। उस समय मंदिर अत्यंत समृद्ध था और यहाँ सोना, चाँदी तथा बहुमूल्य रत्नों का विशाल भंडार था।
इतिहास के अनुसार उसने मंदिर को लूटा, अनेक मूर्तियों को क्षति पहुँचाई और अपार धन लेकर वापस चला गया। यह घटना भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक मानी जाती है।
कई बार हुआ पुनर्निर्माण
Somnath Jyotirlinga का इतिहास केवल आक्रमणों का नहीं बल्कि पुनर्जागरण का भी इतिहास है। अनेक राजाओं और भक्तों ने समय-समय पर मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
- राजा भीमदेव द्वारा पुनर्निर्माण।
- कुमारपाल सोलंकी द्वारा मंदिर का विस्तार।
- महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा शिव मंदिर का निर्माण।
- स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण।
आज का Somnath Jyotirlinga Temple आधुनिक भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान
भारत की स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उनका उद्देश्य केवल मंदिर बनाना नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनः स्थापित करना था।
उनकी प्रेरणा और प्रयासों से वर्तमान भव्य Somnath Jyotirlinga मंदिर का निर्माण हुआ। वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की।
Somnath Jyotirlinga की वास्तुकला
सोमनाथ मंदिर चालुक्य शैली (Chalukya Style) में निर्मित है। इसकी भव्यता, नक्काशी और ऊँचा शिखर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
- मुख्य शिखर की ऊँचाई लगभग 155 फीट।
- शिखर पर विशाल ध्वज, जिसे दिन में कई बार बदला जाता है।
- अरब सागर की ओर खुला भव्य दृश्य।
- पत्थरों पर उत्कृष्ट भारतीय शिल्पकला।
- विशाल सभा मंडप एवं गर्भगृह।
Somnath Jyotirlinga से जुड़े रोचक तथ्य
- 🕉️ यह भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
- 🌙 चंद्रदेव ने यहाँ भगवान शिव की तपस्या की थी।
- 🏛️ मंदिर को कई बार नष्ट किया गया लेकिन हर बार पुनर्निर्माण हुआ।
- 🌊 मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है।
- 🚩 मंदिर का ध्वज प्रतिदिन कई बार बदला जाता है।
- 📿 महाशिवरात्रि और सावन में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
- 🛕 मंदिर परिसर में प्रतिदिन भव्य आरती होती है।
- 🎵 शाम के समय Light & Sound Show आयोजित किया जाता है, जो मंदिर के इतिहास को दर्शाता है।
Somnath Jyotirlinga के दर्शन के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Somnath Jyotirlinga के दर्शन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यहाँ आते हैं।
- भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- चंद्र दोष से मुक्ति की मान्यता।
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
- परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
- रोग एवं संकट दूर होने की मान्यता है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- जीवन में आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।
Somnath Jyotirlinga यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें।
- मंदिर प्रशासन के सभी नियमों का पालन करें।
- शालीन एवं पारंपरिक वस्त्र पहनें।
- कीमती सामान कम लेकर जाएँ।
- भीड़भाड़ वाले दिनों में समय से पहले पहुँचें।
- केवल अधिकृत काउंटर से ही पूजा या अभिषेक की बुकिंग करें।
- पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहयोग करें।
🕉️ Somnath Jyotirlinga हमें क्या सिखाता है?
Somnath Jyotirlinga केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि विश्वास, साहस और पुनर्जन्म की जीवंत मिसाल है। अनेक बार विध्वंस के बाद भी इसका पुनर्निर्माण यह संदेश देता है कि धर्म, सत्य और आस्था को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक शिव भक्त के जीवन में कम से कम एक बार Somnath Jyotirlinga के दर्शन करने की प्रबल इच्छा रहती है।
Frequently Asked Questions (FAQs) – Somnath Jyotirlinga
1. Somnath Jyotirlinga कहाँ स्थित है?
Somnath Jyotirlinga गुजरात राज्य के गिर-सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
2. Somnath Jyotirlinga को पहला ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
शिव पुराण के अनुसार Somnath Jyotirlinga भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर है। सबसे पहले चंद्रदेव ने भगवान शिव की तपस्या कर इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
3. Somnath Jyotirlinga मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
सामान्यतः मंदिर प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है। सुबह, दोपहर और शाम की नियमित आरती होती है।
4. Somnath Jyotirlinga में रुद्राभिषेक कराया जा सकता है?
हाँ। श्रद्धालु मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रुद्राभिषेक एवं विशेष पूजा करा सकते हैं।
5. Somnath Jyotirlinga के दर्शन से क्या लाभ मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, मानसिक शांति मिलती है, जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं तथा आध्यात्मिक उन्नति होती है।
Somnath Jyotirlinga का निष्कर्ष
Somnath Jyotirlinga केवल भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और अद्भुत इतिहास का जीवंत प्रतीक है। अनेक बार विध्वंस के बाद भी इस मंदिर का पुनर्निर्माण यह संदेश देता है कि सत्य, श्रद्धा और धर्म को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि आप भगवान शिव के भक्त हैं, तो जीवन में एक बार Somnath Jyotirlinga के दर्शन अवश्य करें।
🕉️ हर हर महादेव
भगवान सोमेश्वर महादेव आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्रदान करें।
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विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
हर हर महादेव 🚩








