Ganesh Visarjan 2026: कल या परसों, कब होगा बाप्पा का विसर्जन? यहां से दूर करें तिथि का कंफ्यूजन
Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर तक रहेगी. प्रातःकाल सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक विसर्जन का बेहद शुभ मुहूर्त है. जानें पूरे दिन के चौघड़िया मुहूर्त और पूजा विधि.गणेश विसर्जन हिंदू धर्म की एक बेहद पवित्र परंपरा है. गणेश चतुर्थी के दिन जब भगवान श्री गणेश (गणपति बाप्पा) की मूर्ति को घर या सार्वजनिक पंडालों में स्थापित किया जाता है, तो कुछ दिनों तक उनकी पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इसके बाद, तय तिथि (जैसे डेढ़ दिन, 3, 5, 7, 10 या 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी) पर बाप्पा की मूर्ति को जल (नदी, तालाब, समुद्र या कुंड) में प्रवाहित (विसर्जित) कर दिया जाता है. इसी प्रक्रिया को गणेश विसर्जन कहा जाता है.
Ganesh Visarjan 2026 गणेश जी विसर्जन की विधि क्या है?
उत्तरपूजा और अंतिम भोग
विसर्जन से पहले पूजा स्थान पर बाप्पा की अंतिम पूजा (उत्तरपूजा) की जाती है।
गणेश जी को रोली-चंदन का तिलक लगाएं, 21 दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें।
इसके बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाकर पूरे परिवार के साथ आरती उतारें।
विदाई की पोटली और क्षमा प्रार्थना
एक लाल कपड़े में थोड़ा अक्षत, दूर्वा, सिक्के और मोदक बांधकर बाप्पा की प्रतिमा के पास रखें।
इसके बाद हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर से
जल्दी आने की प्रार्थना करें।
स्थान परिवर्तन और प्रस्थान
क्षमा याचना के बाद जयकारों के साथ प्रतिमा को चौकी सहित 2 ईंट आगे खिसका दें,
जो विसर्जन की अनुमति का प्रतीक है। इसके बाद बाप्पा को लकड़ी की चौकी पर विराजमान कर
गुलाल उड़ाते हुए “गणपति बाप्पा मोरया” के जयकारे लगाते हुए प्रस्थान करें।
जल विसर्जन और प्रसाद वितरण
विसर्जन स्थल या घर पर ही पानी से भरे टब में बाप्पा की मिट्टी की प्रतिमा को
आदरपूर्वक धीरे-धीरे जल में विसर्जित करें। विसर्जन संपन्न होने के बाद घर लौटकर
पूजा स्थान को प्रणाम करें और सभी में बाप्पा का प्रसाद वितरित करें।

गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त (Ganesh Visarjan 2026 Shubh Muhurat)
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) –
सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर 10 बजकर 42 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त (चर) –
शाम 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) –
दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ) –
रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) –
रात 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26
दिन पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी।
इसी कारण गणेश विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा।

Ganesh Visarjan 2026 के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)-
सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त (चर)-
शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ)-
दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ)-
रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक।
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)-
12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26
Ganesh Visarjan से पहले करें उत्तर पूजन
गणपति जी की स्थापना के दिन से लेकर जितने दिनों तक आपने उनकी सेवा और पूजा की है, विसर्जन के दिन सबसे पहले उत्तर पूजन किया जाता है। उत्तर पूजन का अर्थ है गणपति जी की अंतिम पूजा, जिसके बाद उनकी विधिवत विदाई की जाती है। उत्तर पूजन की प्रक्रिया काफी हद तक उसी तरह होती है, जैसे आपने स्थापना के समय गणपति जी का पूजन किया था।
सबसे पहले गणपति जी को स्नान कराया जाता है। परंपरा के अनुसार पहले सामान्य जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से पंचामृत स्नान कराया जा सकता है, इसके बाद दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। कुछ लोग गणपति अथर्वशीर्ष के मंत्रों के साथ अभिषेक भी करते हैं। हालांकि, यदि आप अभिषेक नहीं करना चाहते हैं तो सामान्य स्नान और पूजा भी अपनी परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
स्नान के बाद गणपति जी को पहनाएं वस्त्र
स्नान के बाद गणपति जी को नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। पहले उपवस्त्र अर्पित किया जाता है। इसके बाद यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है और फिर ऊपर का वस्त्र अर्पित किया जाता है। इसके बाद गणपति जी को चंदन, अक्षत, दूर्वा, सिंदूर और सुगंधित द्रव्य अर्पित करें। फिर धूप और दीप दिखाएं।
इसके बाद गणपति जी को नैवेद्य अर्पित करें। इसमें मोदक या आपकी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद रखा जा सकता है। नैवेद्य के बाद आचमन और ऋतु फल अर्पित करें। इसके बाद दक्षिणा और तांबूल यानी पान, सुपारी आदि अर्पित करने की परंपरा भी है। चाहें तो अंत में नारियल भी अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद गणपति जी की आरती करें।
पहले गौरी, फिर कलश और अंत में गणपति जी का पूजन
यदि आपने गणपति स्थापना के समय मां गौरी और कलश की भी स्थापना की है, तो उत्तर पूजन में इनका भी पूजन किया जाता है। इस क्रम में पहले मां गौरी को अर्पण करें। इसके बाद कलश का पूजन करें और अंत में गणपति जी का पूजन करें। गणपति जी यहां प्रधान देवता माने जाते हैं, इसलिए उनका पूजन अंत में मुख्य रूप से किया जाता है।
कैसे करें विसर्जन?
कुछ पूजा परंपराओं में माना जाता है कि विसर्जन से पहले की मुख्य पूजा और आरती घर पर ही पूरी कर लेनी चाहिए। इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। वहां पहुंचकर स्थानीय परंपरा के अनुसार संक्षिप्त प्रार्थना करके विसर्जन किया जा सकता है। नदी या तालाब में प्लास्टिक, कपड़ा, फूल-माला या अन्य ऐसी सामग्री नहीं डालनी चाहिए, जो जल को प्रदूषित करें। आजकल कई जगह प्रशासन की ओर से कृत्रिम विसर्जन कुंड भी बनाए जाते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से इनका उपयोग करना उचित विकल्प हो सकता है।
Ganesh Visarjan 2026 मुख्य रूप से शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। Ganesh Chaturthi 14 सितंबर 2026 को है और 10-दिन का Ganeshotsav अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है।
मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है। उदाहरण के लिए Mumbai में 25 सितंबर को प्रकाशित में सुबह 06:28–10:59, दोपहर 12:30–14:01, शाम 17:02–18:32 और रात 21:31–23:01 दिए गए हैं। Fazilka में सुबह 06:24–10:55 और अन्य अलग स्थानीय समय दिए गए हैं। इसलिए आपके blog में एक universal exact time देने के बजाय “अपने शहर के अनुसार मुहूर्त देखें” लिखना बेहतर रहेगा।

Ganesh Visarjan 2026 Uttara Puja: बप्पा को विदा करने से पहले जरूर करें उत्तर पूजा! नियम के साथ जानें विसर्जन की पोटली में क्या रखना जरूरी
Ganesh Visarjan 2026 Muhurat And Choghadiya: अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उनकी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं. मान्यता है कि विसर्जन भगवान गणेश को विदाई देने और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना का प्रतीक है. इस दौरान श्रद्धालुओं को कुछ धार्मिक और पर्यावरण संबंधी बातों का ध्यान रखना चाहिए. जानें बप्पा की पोटली में क्या रखें और विसर्जन का उत्तम मुहूर्त कौन सा है
मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले विदाई पूजा में परिवार के सदस्य भगवान गणेश की मूर्ति के पास इकट्ठा होते हैं. विदाई पूजा में फूल, दूर्वा, फल और नैवेद्य चढ़ाते हैं. साथ ही भगवान गणेश की आरती की जाती है और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. इसके बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार विदाई पूजा की जा सकती है. मूर्ति को पूजा की जगह से हटाने से पहले ‘उत्तर पूजा’ या विदाई की अपनी पारंपरिक रस्म भी निभा सकते हैं. जरूरी बात यह है कि विसर्जन वाली जगह के लिए निकलने से पहले घर की पारंपरिक विदाई रस्में पूरी कर ली जाएं.
बप्पा की आखिरी भेंट के लिए एक अलग थाली तैयार की जा सकती है. पूजा का जरूरी सामान अलग-अलग ले जाने के बजाय एक साथ रखा जा सकता है. मूर्ति को आखिरी विदाई के लिए फूलों और साधारण सजावट के साथ तैयार किया जाता है. लोग बप्पा को तय विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं. इस दौरान वे भक्ति गीत गाते हैं और जयकारा लगाते हैं. साथ ही बप्पा की विदा करते समय एक छोटी सी लाल या पीले रंग के कपड़े में पोटली बांधकर दी जाती है.
मोदक या लड्डू: भगवान को प्रिय भोग के रूप में
दूर्वा: श्रीगणेश को अर्पित हरी घास
हल्दी की गांठ: शुभता और समृद्धि के लिए
सुपारी: अखंडता और पूजन की पूर्णता के लिए
अक्षत (चावल): पूर्णता और अक्षुण्णता का प्रतीक
थोड़े सिक्के या दक्षिणा: श्रद्धा स्वरूप
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों, भक्ति भजनों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ जयघोष के साथ भगवान गणेश को विदा करते हैं, इस विश्वास के साथ कि वे अगले साल फिर आएंगे. घर पर होने वाले उत्सव के लिए किसी उपयुक्त बर्तन, कृत्रिम तालाब या तय टैंक में विसर्जन किया जा सकता है. लोगों को मूर्तियों को स्थानीय व्यवस्था के अनुसार तय विसर्जन स्थलों पर ले जाना चाहिए.
प्रातः काल शुभ मुहूर्त – सुबह 06:12 बजे से सुबह 10:42 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
चर एवं लाभ मुहूर्त – दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक
गणेश विसर्जन के लिए उत्तम मुहूर्त – सुबह 06:12 बजे से लेकर दोपहर 12:36 बजे के बीच
विधिवत पूजा करें: विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा, आरती और नैवेद्य अर्पित करें.
उत्तर पूजा करें: परंपरा के अनुसार विसर्जन से पहले गणेशजी की उत्तर पूजा की जाती है.
शुभ भाव से विदाई दें: गणपति बप्पा से परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.
प्रतिमा को सम्मान से ले जाएं: विसर्जन यात्रा के दौरान गणेश प्रतिमा को झटका या अनादर ना पहुंचाएं.
निर्धारित स्थान पर विसर्जन करें: प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब या निर्धारित विसर्जन स्थल का उपयोग करें.
पर्यावरण का ध्यान रखें: प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रंगों वाली प्रतिमाओं से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाएं.
निर्माल्य अलग रखें: फूल, पत्ते और पूजा सामग्री को जल में ना फेंकें, निर्धारित स्थान पर रखें.
सुरक्षा का ध्यान रखें: नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन करते समय बच्चों को अकेले पानी के पास ना जाने दें.
श्रद्धा और अनुशासन बनाए रखें: विसर्जन के दौरान धार्मिक भावनाओं के साथ सार्वजनिक व्यवस्था और स्थानीय नियमों का पालन करें.

23 सितंबर को पूरे हो रहे हैं 10 दिन
गणेश चतुर्थी से तारीखों की सामान्य गिनती करें तो 14 सितंबर पहला और 23 सितंबर दसवां दिन बनता है. यहीं से भ्रम पैदा हो रहा है. कई लोग मान रहे हैं कि 10 दिन पूरे होते ही गणपति विसर्जन कर देना चाहिए, लेकिन धार्मिक पर्व केवल सूर्योदय से बदलने वाली तारीखों के आधार पर तय नहीं होते.गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी को संपन्न होता है. इसलिए मुख्य गणेश विसर्जन के लिए 10 तारीखें पूरी होने के बजाय चतुर्दशी तिथि का होना आवश्यक माना जाता है.
23 सितंबर को कौन-सी तिथि रहेगी?
पंचांग के अनुसार 23 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल द्वादशी रहेगी. इसी कारण इस दिन वामन जयंती भी मनाई जाएगी. इसके बाद त्रयोदशी और फिर चतुर्दशी तिथि आएगी.
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात लगभग 11:17 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर की रात लगभग 11:08 बजे समाप्त होगी. 25 सितंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहने के कारण इसी दिन अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी और मुख्य गणेश विसर्जन किया जाएगा.
10 दिन का उत्सव फिर 12 तारीखों तक क्यों?
यह अंतर तिथि और तारीख की अवधि के कारण बना है. अंग्रेजी कैलेंडर की प्रत्येक तारीख रात 12 बजे बदल जाती है, लेकिन हिंदू पंचांग की तिथि चंद्रमा और सूर्य की गति के आधार पर बदलती है. कोई तिथि 24 घंटे से छोटी या बड़ी हो सकती है. इसी कारण कभी-कभी 10 दिनों का कहा जाने वाला गणेश उत्सव अंग्रेजी कैलेंडर में 10 से अधिक तारीखों तक दिखाई देता है.
Ganesh Visarjan 2026 इसलिए 14 से 25 सितंबर के बीच 12 तारीखें पड़ने का अर्थ यह नहीं है कि इस बार धार्मिक गणना गलत हो गई है. उत्सव का निर्धारण चतुर्थी से चतुर्दशी तिथि तक होता है.
क्या 23 सितंबर को गणेश विसर्जन नहीं कर सकते?
Ganesh Visarjan 2026 यह कहना सही नहीं होगा कि 23 सितंबर को विसर्जन करना पूरी तरह वर्जित है. घरों में विराजमान गणपति का विसर्जन अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं और संकल्प के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या अन्य निर्धारित दिनों में किया जाता है. किसी विशेष कारण से परिवार ने 23 सितंबर को विदाई का संकल्प लिया है तो अपने कुलाचार या पुरोहित की सलाह से विसर्जन किया जा सकता है.
लेकिन जिन श्रद्धालुओं ने गणपति को अनंत चतुर्दशी तक विराजित रखने का संकल्प लिया है, उन्हें 25 सितंबर को ही विसर्जन करना चाहिए. सार्वजनिक पंडालों और बड़े गणेशोत्सवों का मुख्य विसर्जन भी सामान्यतः अनंत चतुर्दशी पर ही होता है.
क्या पंचक का पड़ेगा असर?
23 सितंबर की रात से पंचक शुरू होने को लेकर भी भ्रम बना हुआ है. पंचक मुख्य रूप से कुछ विशेष निर्माण, लकड़ी एकत्र करने, चारपाई बनाने और दक्षिण दिशा की यात्रा जैसे कार्यों में विचार किया जाता है. गणेश विसर्जन एक पर्वकालीन धार्मिक अनुष्ठान है, जिसकी तिथि पहले से अनंत चतुर्दशी के आधार पर निर्धारित होती है. इसलिए केवल पंचक लगने के कारण मुख्य गणेश विसर्जन की तारीख बदलना आवश्यक नहीं माना जाता.

इसलिए 25 सितंबर को होगी बप्पा की मुख्य विदाई
सीधी बात यह है कि 23 सितंबर को तारीख के हिसाब से गणेश उत्सव के 10 दिन अवश्य पूरे हो रहे हैं, लेकिन उस दिन चतुर्दशी तिथि नहीं होगी. अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को उदया तिथि में रहेगी. इसी कारण बप्पा की मुख्य विदाई 23 नहीं, बल्कि 25 सितंबर को की जाएगी.
FAQ
Ganesh Visarjan 2026 कब है?
मुख्य Ganesh Visarjan 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा.
क्या 23 सितंबर को गणेश विसर्जन कर सकते हैं?
पारिवारिक परंपरा या पूर्व संकल्प के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन अनंत चतुर्दशी वाला मुख्य विसर्जन 25 सितंबर को होगा.
गणेश उत्सव के 10 दिन 23 सितंबर को पूरे होने के बाद भी विसर्जन 25 सितंबर को क्यों है?
क्योंकि गणेश उत्सव का समापन अंग्रेजी तारीखों की गिनती से नहीं, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि से निर्धारित होता है.
क्या पंचक में गणेश विसर्जन किया जा सकता है?
गणेश विसर्जन पर्व की निर्धारित तिथि पर होने वाला धार्मिक अनुष्ठान है. सामान्यतः पंचक के कारण इसकी तारीख नहीं बदली जाती.
📿 Jaap Pro के साथ अपना Digital Jaap शुरू करें
अगर आप रोज मंत्र जाप करने का लक्ष्य बना रहे हैं और जाप की संख्या को आसानी से track करना चाहते हैं, तो Jaap Pro Digital Jaap Counter को आजमा सकते हैं।
आप अपने पसंदीदा मंत्र का जाप करते हुए Digital Counter से counting रख सकते हैं और अपने daily chanting routine को व्यवस्थित कर सकते हैं।
आज ही अपने लिए एक सुविधाजनक समय तय करें, अपना मंत्र चुनें और जाप की एक छोटी-सी routine शुरू करें।
📲 Jaap Pro App Google Play Store से डाउनलोड करें
▶️ Jaap Pro YouTube Channel देखें
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏





